Tuesday, September 22, 2015

सनक का दारोगा पार्ट - 2

सनक का दारोगा पार्ट - 2
उस दारोगा की दबंगई ने पूरे देश को हिला दिया दिया, आम लोगों से लेकर निजामों तक सबके होश फाख्ता हो गए थे
चारों तरफ सवाल था कि अगर कानून के हाथ लंबे है तो उसे पैर चलाने की जरूरत क्यों पड़ी ?
उस सनक के दारोगा की उस चाल ले कानून को अंधे के साथ लंगड़ा कर भी दिया था ।
वो उस बूढ़ा टाइपिस्ट उस मंजर को याद भी नहीं रखना चाह रहा था लेकिन भूलना भी उसके बस की बात नहीं थी।
फिर क्या था सरकार  सकते में आई और कर सकने की स्थिति में भी पहुंच गई ।
कि जीतनी मदद हो सकेगी कि जाएगी
शहर का कलक्टर अपने साथ हिंदी और अंग्रेजी के दो टाइपराइटर लेकर बूढे टाइपिस्ट के घर पहुंचा।
टाइपिस्ट ने अंग्रेजी लौटा दी और हिन्दी टाइपराइटर अपने पास रख लिया।
वो सोचा चलों कोई बात नहीं वो दारोगा ही सनकी था बाकी सब लोग तो समझदार हैं,संवेदनशील है । मेरे साथ गलत हुआ तो क्या हुआ ?
बाद में कुछ तो सही करने का प्रयास किया गया।
बस उसकी मांग थी कि काश! सबके साथ ऐसा हो पाता।
इसी उम्मीद में उसका एक एक  दिन गुजरने लगा लेकिन सरकार तो दिन ब  दिन ऐसी पीछे पड़ी मानो उत्तम प्रदेश में सिर्फ उसकी ही सुरक्षा बहुत जरूरी है ।
साइकिल से आने वाले उस टाइपिस्ट की सुरक्षा में सरकार ने पुलिस पर ही ले- आने और ले- जाने कि जिम्मेदारी डाल दी , अब हर सुबह बाबा के घर पुलिस जीप में पहुंचती है फिर बाबा अपना टाइपराइटर लेकर जीप में बैठते है और हजरतगंज के उसी फुटपाथ पर आ जाते है, फिर दिनभर के काम के  बाद उसी नीली जीप में पीछे बैठ कर वापस घर जाते हैं
अब दिन भर का ऐसा ही चलने लगा...सुबह पुलिस की जीप में बैठना, फिर फुटपाथ पर बैठना, शाम को फिर पुलिस की जीप में बैठना और घर चलने आना।
हा लेकिन वक्त चाहे जितना भी बदल गया हो टाइपिस्ट बाबा के नसीब से फुटपाथ नहीं जा सका। भले ही सरकार ने इतना बड़ा बीड़ा उठा लिया हो
धीरे-धीरे बाबा को महसूस हुआ कि उसका इस्तेमाल हो रहा है फिर बाबा एक दिन बाबा ने सोचा कि क्यों न सरकार के साथ भी वैसा ही कुछ किया जाए जैसा कि सरकार ने उसके साथ किया ।
फिर क्या सरकार के रवैये से आजीज आ चुके बाबा ने भी ठीक वैसे ही सरकार के टाइपराइटर को लात मार दी जैसे उस दिन बाबा के टाइपराइटर को उस सनक के दारोगा ने मारी थी ।
फिर बाबा आजाद, पुलिस चली गई , जीप भी चली गई, बाबा अब अपनी साइकिल पर अपना टाइपराइटर लादता है और उसी फुटपाथ फिर से बैठता है। वही फुटपाथ जो सरकार भी उसके नसीब से नहीं छिन सकी जिसने और देने का डिंडौरा पूरा पीट दिया था

Tuesday, August 18, 2015

बिहार मालामाल या फिर weekly ?

बिहार मालामाल या फिर weekly ?
जी हाँ
आज बिहार में सौगातों की आकाशवाणी हुई। आकाशवाणी होते ही बिहार में लगा की दीवाली आज ही मन गयी। हम तो कन्फ्यूज हो गए की करोड़ ज्यादा होता है या लाख , जहाँ तक मेरा गणित बताता है वो ये है कि करोड़ ज्यादा होता फिर दिमाग में एक सवाल आया की अगर करोड़ ज्यादा होता है तो फिर लाख को करोड़ से पहले क्यों लाया गया । लेकिन फिर दिमाग की बत्ती जली और पता चला की अगर करोड़ से पहले लाख आ जाये तो मामला और बड़ा हो जाता है।
और वही हुआ आज, जैसे ही बादशाह ने अपना पिटारा खोला मनो की आरा में अशर्फियों की बारिश होने लगी
और लोग निजाम के जय घोष में जुट गए
सब सुखी हो गए ,सब संपन्न हो गए आखिर जनता को क्या चाहिए इसके अलावा लेकिन जनता अब जानना चाहती है की वो अब मालामाल है या फिर Weekly?
सवाल जायज है और पूछा जाना चाहिए लेकिन जवाब भी आना चाहिए
आखिर जनता के बीच में सौगात देने का यह सलीका कितना सही है, क्या पी एम सच में जनता का उत्साह देख कर ही पैकेज की राशि बढ़ाते रहे?
क्या अब देश की जनता को ज्यादा से ज्यादा वाजिब हक़ पाने के लिए अपने निजाम के सामने जरूरत की नुमाइश शोर,हल्ला,जयकारे के रूप में करनी होगी?
और अगर नुमाइश देख कर पी एम को मजा नहीं आया तो क्या फिर हक़ का पैसा नहीं मिलेगा
फिर क्या हमको सड़क,बिजली,अस्पताल नहीं मिलेगा
तो क्या ये भी मान लिया जाये की जनता अब जनार्दन न हो कर सर्कस का जोकर गयी है की अपना करतब दिखाओ और बक्शीस में विकास ले जाओ?
जो भी बिहार में आज कई सौ लाख करोड़ की बात हो रही है।
दावा किया जा रहा है की आज तक जो बिहार हुआ है अब उससे ज्यादा अच्छा होगा
खैर जो भी हो बिहार ने अब अपनी हार को टालने के लिए वाजपेयी के भाजपाईयों ने अपनी ताकत झोंक दी है
लेकिन आज के इस एलान ने सवाल यही खड़ा किया है की अब बिहार मालामाल है या weekly?

Thursday, August 13, 2015

प्रधानमंत्री जी आपको पता है..?

आदरणीय
नरेंद्र मोदी जी
प्रधानमंत्री (भारत सरकार )
आपको प्रधानमंत्री भारत सरकार कहें या सिर्फ प्रधानमंत्री भारत, क्योंकि सरकार में प्रधानमंत्री के अलावा भी कई मंत्री आते हैं जिनको कैबिनेट कहा जाता है लेकिन विपक्ष की हठधर्मीता और आपकी हर मामले पर चुप्पी ने बार बार जनता को यही संदेश दिया है कि आप अकेले ही प्रधानमंत्री भारत सरकार है बाकी किसी को किसी से कोई मतलब नहीं ।
मुद्दा किसी का भी हो सबको जवाब  आपका ही चाहिए । और आप जवाब दे नहीं दे रहे हैं क्याहो जाता जब आप जवाब दे देंते तो, जब बाप बेटे के सरकार के बाप की आप गतिरोध समाप्त करने की कोशिश में तारीफ कर सकतें हैं। और जब आपकी सरकार लैंडबिल पर आधा दर्जन संसोधन करके उसे यूपीए सरकार की तरह बना सकती हैं । तो आखिर आप इन मुद्दों पर जवाब क्यो नहीं देने आए ।
अगर आपकी सरकार ने सदन चलाने की पूरी कोशिश कि तो एक आखिरी कोशिश आप ने क्यों नहीं कि ये है मेरा जवाब अगर फिर भी कांग्रेस सदन नहीं चलते देती तो आप इस अगस्त में जितना चाहे उतना मार्च करते । कोई कुछ नहीं कहता कम से कम मै तो नहीं ही कहता ।
सर जी,
बताया जा रहा है कि इस बार सत्र नहीं चलने से करीब जनता के 270 करोड़ रूपए बर्बाद हो गए । क्या आपकी चुप्पी ,आपकी गैर मौजूदगी देश के आम लोगों के 270 करोड़ रूपए से भी कीमती थी । आखिर हम आपके उस गैस सब्सिडी छोड़ने वाले विज्ञापन पर किस तरह से अमल करें । हमें इन पांच सालों में यही डर लगा रहेगा कि आपके कहने पर हमने अपनी सब्सिडी छोड़ी और वो पैसे संसद के हंगामे की भेट चढ़ जाए।
आखिर आपकी चुप्पी को हम जैसे लोग  क्या समझे..? क्या वही समझे जब मनमोहन सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा था कि हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी,न जाने कितने सवालों के आबरू बचा रखी है ।
आप तो देश से लेकर प्रदेश और तो और परदेश में भी बोलने के लिए जाने जाते है ,यह भी मानना होगा कि आपके संबोधन में वो शक्ति है जो लोगों के प्रभावित करती है लोग आपको ध्यान से सुनते है ,आपके बोलने की कला के देख कर ही हमको कम्यूनिकेशन में फीडबैक के महत्व का पता चला कि कैसे आप अपने भाषण में लोगों से बीच बीच में पूछते रहे और लोग आपको जवाब भी देते है । लेकिन आखिर क्या वजह है कि हर जगह बोलने वाला वो व्यक्ति उस मंदिर में अब नहीं बोल रहा है जहां वो बोलते वक्त फफक पड़ा था । वो पल भी याद भी है जनता को जब आपने सदन की सीढियों पर अपना माथा रख दिया था । लेकिन जब देश आपको सदन में सुनना चाहता था तो आखिर आप क्यों नहीं बोलने आए ।
आप जब ट्वीट करके सुंदर पिचाई को बधाई दे सकतें है तो आप ट्वीट करके कांग्रेसियों को जवाब क्यों नहीं दे रहे थे  ।

आपको पता नहीं पता होगा कि नहीं होगा....यहां आपके उपर हर बयान पर लोग लतीफे बना रहे है, फेसबुक ,ट्वीटर और न जाने कहा कहां आपके बारे में क्या क्या बोला जा रहा है लेकिन पता आप चुप हैं । जाने क्यों ?
उम्मीद है कि आप भविष्य में चुप नहीं रहेंगे ,जैसे  आप बिहार में बोलते है जैसे आप उत्तर प्रदेश में बोलेंगे ठीक वैसे ही संसद में भी बोलेंगे।
देश को आपसे बहुत उम्मीदें हैं । देश दिल में पूर्णबहुमत की महत्ता बनाई रखिए...नहीं तो जनता पूर्ण बहुमत से डरने लगेगी ।

धन्यावद
आपका
मनीष यादव

Tuesday, August 11, 2015

कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा....?

कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा....?
जब से इस सवाल को मैंने स्टे्टस में डाला है तब से दिमाग में ये घूम रहा है
बात सिर्फ अब कटप्पा की नहीं रही है , बात उन सभी लतीफों की जो हमारे अगल बगल रोजाना बनते रहते है ।
किसी मुद्दे पर राहुल गांधी पर चुटकुला बन जाना,विराट कोहली का आउट होना तो अनुष्का शर्मा पर जोक्स बन जाना,मोदी के भाषण पर मसखरी से लेकर कर केजरीवाल,अन्नाहजारे, अच्छेदिन,बिगबॉस पर रोजाना नए ट्रेंड के चुटकुले हमारे बीच आते है ।
सबसे अच्छी बात तो यह कि अभी तक बिरयानी ही वेज और नॉनवेज मिलती थी लेकिन कैटगरी वाइज हम लोगों ने जोक्स को भी वेज और नॉनवेज में बांट दिया है।
जिसकों हम छुपाते तो पूरा है लेकिन दोस्तों के बीच में ठहाके भी खूब लगाते है तो कभी चुपके से दफ्तर में,बस स्टैंड,चाय की दुकान पर पढ़ कर मन ही मन मुस्करा लेते है।
लेकिन इस सबके बीच अब लतीफों का संसार आगे निकल चुका है वो अब संता-बंता और रजनीकांत के बीच ही नहीं रहा
अब लतीफा किसी का भी बन सकता है सुबह गिरफ्तार हुए नावेद नाम के आंतकी पर आपको शाम तक दो दर्जन लतीफे मिल जाएंगे।
विराट कोहली के जीरो रन पर आउट होने पर आपको चंद मिनट में व्यग्यात्मक रूप से कोहली के आउट होने की बीस वजह ह्वाट्सएप पर मिल जाएगी
भारत-पाकिस्तान का सीज फायर उल्लंघन हो या फिर अमरिकी राष्ट्रपति का भारत दौरा या फिर भारत के प्रधानमंत्री का फ्लाइट मोड में रहना हो
ये सारी बाते सिर्फ इस वर्जुअल लतीफा अनलिमीडेट कंपनी से निकले है जिसका 100 फीसदी शेयर सिर्फ जनता के पास है यह पता नहीं कि ये इंडस्ट्री नो प्रोफीट नो लॉस पर काम करती है या फिर खुलकर हंस लेना और खिल्ली उड़ाने मात्र को ही यह शुद्ध मुनाफा मानते है ।
आखिर ये जोक्स कहां बनते होंगे...फिर वो कहां से कहां होते होते आप तक पहुंचते होंगे और फिर भी आपका कोई दोस्त कहता होगा कि अरे ये वाला बहुत पुराना है ।
लेकिन अब सोचिए इस इंडस्ट्री के रिच पर जिस पर ये भी लिखा होता है कि जल्दी से फॉरवर्ड करों मार्केट में नया है ।
लेकिन एक बता तो तय है कि लतीफा सिर्फ लतीफा ही नहीं रहता है उसमें भी मेंटल एनर्जी लगानी पड़ती है क्योकि जो सवाल 250 करोड़ की फिल्म बनाने वाले निर्देशक ने नहीं सोचा वो सवाल किसी एक मसखरे ने सोचा और पूछ भी लिया कि आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यो मारा...?

Sunday, October 19, 2014

मोदी बने भारतीय राजनीति के बालि

नमस्कार मित्रो,,,,,ध्यान से मितरों नहीं कह रहा...
मनीष हूं मोदी नहीं..वैसे हो भी नहीं सकता और न ही होना चाहता हू...खैर छोड़िए क्या बतीयाने आए थे संबोधन में ही उलझ गए....
लोकतंत्र  के महापर्व  का एक और पर्व महाराष्ट्र और हरियाणा में संपन्न हुआ और चुनाव का परिणाम भी लोगों के सामने आया है...इस चुनाव में राजनीतिक पंडितों आकड़े मौसम विभाग के हुदहुद के आकलन की तरह करीब करीब सही साबित हुए है...मोदी की इस हुदहुद ने हरियाणा में कांग्रेस को तबाह कर दिया....वही महाराष्ट्र में भी सत्ता के रथ के सारथी होगी बीजेपी....लोकसभा के बाद अगर उपचुनाव को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी में मोदी मैजिक का दूसरा लोकतांत्रिक शो पूरी तरह से बैंग बैंग रहा...उनको इसकी बधाई....बात करें कांग्रेस की तो इसकी जगह जगह सिरियसली कॉमेडी नाइट्स ही नजर आ रही है. वही मोदी महाराष्ट्र और हरियाणा के  मतादाताओं को मोटीवेट करने में कामयाब हुए लेकिन भारतीय राजनीति के सबसे बड़ा भंवर माने  जाने वाले  उत्तर प्रदेश और बिहार में मोदी का मैजिक....टाटा की मैजिक छोटा हाथी ही साबित हुआ जो लड़ा तो लेकिन हार गया....लेकिन यहा बात मोदी मैजिक के बैनर तले हुए इस दुसरे शो की जो पूरी तरह सफल हुआ...मोदी ने महाराष्ट्र में इस बार मानसिक राजनीति की....मोदी जो इस चुनाव में वोटरों के ऑनर किलिंग का शिकार नहीं होना चाहतें थें....लिहाजा मोदी ने मानसिक राजनीति करते हुए शिवसेना के साथ उन्होने तलाक ले लिया लेकिन  महाराष्ट्र के लोग इसे समझ नहीं सकें.. महाराष्ट्र के लोग बीजेपी और शिवसेना में हुए तलाक को  दोनों पार्टियों का एक बड़ा राजनीतिक दु:साहस मान रहे थें लेकिन तलाक के बाद भी कोई अपने एक्स फॉदर इन लॉ के सम्मान में रैलियों में कुछ नहीं बोलेगा...इसकी राजनीति भी कोई नहीं समझ सका..मोदी ने बाला साहेब के बारे में कुछ नहीं बोला की इसलिए की वो उनका सम्मान करतें है क्या वो इंदिरा ,नेहरू ,लोहिया का सम्मान नही करते...लेकिन इस तलाक के कारण वो मतदाता जो उत्तर भारतीय और बिहारी है वो भी बीजेपी के करीब आया जो शिवसेना को नहीं चाहता था..लेकिन वो फॉदर इन लॉ के रिस्पेक्ट की राजनीति समझ नहीं सका और बीजेपी को एक दो तीन (123) करते हुए सत्ता के शिखर पर गयी...और इधर शिवसेना ने भी ऐलान कर दिया अभी तलाक हुआ नहीं है... मामला फैमिली कोर्ट है अगर कोई कांउसलिंग करता है तो वो समझने के लिए तैयार है....खैर जो भी हो राजनीति में कुछ सही सही के करीब हो सकता है लेकिन सही कुछ भी नहीं होता है...क्यों कि मोदी भावनाप्रधान नेता नहीं है इसलिए प्रफुल्ल पटेल के न्यौते को भी मीडिया में उछाल दिया है....की अकेले की मेहनत है जहां इतना गेन किया वह थोड़ी बारगेनिंग तो की ही  है। .... ये बात तो माननी  पड़ेगी की उन्होने बीजेपी को नया रिवाइटल दिया है जिससे पूरी बीजेपी जोश में है...हरियाणा का परिणाम देखकर भी यही लगता है...जहां बीजेपी ने सीएम के उम्मीदवार की घोषणा किए बगैर चुनाव लड़ा और नेताओं और कार्यकर्ताओं को सिर्फ चुनाव  पर फोकस करने को कहा....अमित शाह के आक्रामक रवैये ने कार्यकर्ताओं ने जोश भरा तो हुड्डा भी हर वक्त हड़बडाते रहें....मेरे एक मित्र जो एड कैंपेन के लिये काम करते है वो उन्होंने हरियाणा में हुड्डा की स्थिति बताई...लिहाजा मोदी ने हरियाणा में भी बीजेपी के हुड़हुड़ दबंग घोषित किया है....इन परिणामों से एक बात और निकल कर सामने आई है पता नहीं ये बात सामना में छपे या नहीं इसलिए यहा लिख रहा हूं...कि मोदी ने अपने इस एकतरफा प्रदर्शन से ये साबित कर दिया है...वो बीजेपी और भारतीय राजनीती के बालि बन कर सामने आए है...वो जिससे लड़ने जातें है उसका आधा बल अपने अंदर खींच लेते है...बस मोदी के अब राम ही मार सकतें है...ऐसा ही हुआ था रामायाण में....
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Thursday, September 11, 2014

जो साला लव है वो शुरू से ही जेहादी रहा है

अबे वीकली ऑफ़ के दिन मूड  ऑफ़ न करो
जा कर पहीले सोशल इंजीनियरिग को समझो तभी कहते है की अभी मानसिक रूप से अवयस्क हो तो हठीया जाते हो की अब हम बड़ा हो गया हूँ
सुनो
ये जो साला लव है वो शुरू से ही जेहादी रहा है ये झारखण्ड और जबलपुर से  ही नही शुरू हुआ है
साला बच्चें  कितने हिम्मत से उनके खिलाफ होते है जिन्होंने उनको ऐट लिस्ट अठारह साल तक पाला पोशा
लड़कें  बेचारे प्रेमिका का नाम  मोबाइल में रितेश लिख कर सेव करते है और घर परिवार समाज के डर से लड़की रीता का नाम लिख देती है प्रेमी की नाम की जगह
की बाप इंस्पेक्टर गोपी चन्द्र भी बन जाये तो भी न पकड़ पाए...और जब पकड़े जाते हैं और तो ये टीवीबाज़ टाइप के दो कौड़ी के लोंग  खाप पंचायत कर के लड़के लड़की दोनों को बेज्जत करते है … अबे अगर ये रोकना है तो बच्चों तो इतनी छूट तो दो की अगर प्रेम है तो घर वालों से बता सके ये बेचारे ।
अबे लव स्टोरी पर बनी फिल्म को अपनी पाकिट फूंक १०० करोड़ कमवा देते तो लेकिन लव को समझ जाओ तो कम से कम घर की खुशियां फुकने से बच जाएँ
इसलिए बात को समझो और लोगों को भी समझाओ, हमेशा की अपनी दिमागी डिक्टेटरशिप से ये मत समझना की दो मिनट के आये और ज्ञान दे कर चले गए …ज्ञान है ही नही मेरे पास 

Thursday, July 3, 2014

व्यापम की व्यापकता पर जाएं

दोस्तों एमपी में हुं....इस वजह से यही के बारें में लिखना ज्यादा सुविधाजनक हो रहा है क्योकी पढ़ कर लिखना हमको आया ही नहीं आज तक..... इसी वजह से इस पते पर आपसे कम ही मुलाकात हो पाती है.....
हालांकि पहले मै मित्रों लिखता था लेकिन जब मोदी जी को मित्रों कहते सुना है तब से ये संम्बोधन हमको ठगने वाला लगता है.....
खैर मुद्दे  पर आते है एमपी गजब है और सच में गजब है..इस वजह से नहीं की सैकड़ो यहां शेर है..इस वजह से की जिस स्टेट में पिछलें चार साल से डाक्टर नकली , आरक्षक नकली , फूड इस्पेंक्टर नकली , परिवहन आरक्षक नकली, दुग्ध विभाग के कर्मचारी नकली और सरकार को पता ही नहीं वो स्टेट अपने आप में गजब है...कैसे व्यापम मतलब व्यवसायिक परीक्षा मण्डल को यहा के सिस्टम ने व्यावसाय का परीक्षा मण्डल बना दिया है...और सत्ता और विपक्ष दोनों के वार पलटवार का नाट्य रुपांतरण सड़क और सदन दोनों में रोज देखा जाता है..लेकिन किसी ने भी ये व्यापम की व्यापकता पर ध्यान नहीं दिया की इसका प्रभाव क्या हो रहा है...सारे के सारे सिर्फ राजनीतिक रस्मो रिवाज पर ही ध्यान दे रहे है...सीएम इस्तीफा दे और सीएम कह रहे की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा....लेकिन सीएम साब यह नहीं सोच रहे की जहां सिर्फ पानी ही पानी हो उसमें उनकी जांच दूध कहां से लाएगी...बीजेपी जो टू जी घोटालें और कोयला घोटाले पर आसमान सिर पर उठा कर घूम  रही थी की जनता के पैसों का बंदरबाट हुआ है इतने पैसों से पता नहीं कितने गांवों की बिजली और कितने लोगों को रोजगार मिल सकता है कहा करती थी....वो इस फर्जीवाड़ें में आखिर मुखर क्यों नहीं हो रही है....क्योकिं घोटाले ज्यादा खतरनाक फर्जीवाड़ा होता है..टू जी से हम लोगों को क्या नुकसान हुआ हमको आज तक पता नहीं चला...लेकिन उन छात्रों से पुुछिए की जिन्होने एक अदद नौकरी के लिए फार्म भरा था...पेपर दिया था ...माना की फेल भी हो गये...लेकिन जब उनको पता चला की उनको फेल इस वजह से होना पड़ा क्योकि जो फेल हो जाते , उनको पास कराना था....अब आप ही सोचिए की तंरगों की चोरी या कोयले की चोरी और भविष्य की चोरी , उम्मीदों की चोरी , सपनों की चोरी में कौन बड़ा होता है.. देश के लोगों के लिए इसमें से कौन सी चोरी ज्यादा खतरनाक साबित होगी...खैर हर मामले की जांच होती है इसकी भी चल रही है लेकिन जांच के नाम पर उनको पुलिस ने उठा लिया जिन्होने सिर्फ फार्म  भरा था...उनको उठा लिया जिनको दलालों ने फोन किया था , उनको उठा लिया जिनकी उनती हैसियत ही नहीं की वो दस दस लाख लेकर अपने बच्चों को पास करा सकें..और जो बड़ी मछली है उन तक हमारी जांच एजेंसी पहुंच ही नही पा रही है....सीएम साब क्यो नहीं नैतिकता के आधार पर कोई कड़ी कार्रवाई रहे है..क्या अपने एक मंत्री को गिरफ्तार करा देने से ही उनका काम खत्म हो जाता है....अगर सब कुछ सही हुआ है तो तोते से जांच क्यों नहीं करा देतें...अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई दोनों क्यों नहीं प्रभावित छात्रों के लिए धरना दे रहे है...क्यो दोनों सिर्फ अपने आप को इस राजनीति में स्थापित करने के लिए ही पुलिस के वाटर कैनन के सामने भींग रहे है....क्यों नहीं वो उन छात्रों के आंसुओं में भींग कर सरकार से कोई एक साकारात्मक उपाय की बात कर रहे है...क्यों नहीं मामा अपने भांजे भांजियों के लिए कोई ऐसा रास्ता निकाल रहे है की जैसे ये घोटाला इतिहास बनता जा रहा है वैसे इसका ट्रीटमेंट भी एक ऐतिहासिक हो जाएं...सत्ता और विपक्ष दोनों को व्यापम की इस अंधेरी व्यापकता पर जाना होगा...जो इस घोटाले के उजागर होने के बाद गुम हो गई है...क्योकि मामा का रिश्ता तो हमारे समाज में सबसे प्रिय रहा है , सिर्फ एक शकुनि को छोड़ कर...